Thursday, March 27, 2014

ghosna patra

लो भैया घोषणा पत्र की  नयी किताब आयी है,
 वादों और इरादों की  इसमें खूब दुहाई है ,
 होने न होने के बीच एक गहरी खाई है ,
 क्योंकि इसमें नीचे टर्म्स एंड कंडीशन अप्लाई है। 

Tuesday, June 19, 2012

WE , THE PEOPLE OF INDIA: uttar pradesh or uttam pradesh.......

WE , THE PEOPLE OF INDIA: uttar pradesh or uttam pradesh.......

Monday, June 4, 2012

uttar pradesh or uttam pradesh.......

ये उत्तर प्रदेश है और मै बात करने जा रहा हूँ लखनऊ की जो की यू पी की राजधानी है,ख़राब सड़के,तंग होते रास्ते और अराजक होता यातायात यहाँ की पहचान बन गया है,जिसकी जितनी बड़ी गाडी उसकी उतनी ज्यादा हनक,मन करे तो वो किसी के भी ऊपर गाडी चढ़ा दे,और अगर उसपे सत्ताधारी दल का झंडा हो तो फिर तो यातायात पुलिस भी उनके लिए मायने नहीं रखती,वो कानून को जेब में रखते है,प्रेसर हार्न ,हूटर लगाना स्टेटस सिम्बल बन गया है भले ही उससे आपका कान फट जाए,बाकी जगहों का हाल भी भगवान् भरोसे ही है,कुल मिलाकर क़ानून का पालन न हो रहा है और न पालन करवाने की इच्छाशक्ति नज़र आ रही है.अक्सर दिल्ली जाते समय रात में मथुरा के आगे पुलिस वाले गाड़ियों से वसूली करते मिल जायेंगे.ये हाल कमोबेश हर जगह का है.हालांकि क़ानून ब्यस्था दुरुस्त करने के लिए इच्छाशक्ति ही काफी होती है,जिसका की अभाव है.बिजली की हालत भी दयनीय हो गयी है,पिछली सरकारों ने वादे तो खूब किये लेकिन काम न किया,पूर्वांचल में हजारों बच्चे जे इ बुखार से मर रहे है लेकिन इनपे राजनीति बदस्तूर जारी है ,जाहिर है मरने वालों में गरीब ज्यादा है ,अमा अमीर लोग बीमारी से कहाँ मरते है.कुल मिलाकर हालात पे रोना आता है ,फिलहाल बदलाव की बात हो रही है लेकिन अभी इंतज़ार लंबा है.नयी सरकार के मुखिया ने कुछ उम्मीद जगाई है लेकिन उनके मंत्रीगड़ गुडगोबर करने में लगे है,ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे की सत्ता के कई केंद्र बन गए है ,अगर ऐसा हुआ तो ये ठीक नहीं होगा,गाँव की हालत और बदतर है,लोग गर्मी में पानी - बिजली की किल्लत झेल रहे हैं.किसानो की हालत भी पतली ही है,पुलिस वाले पहले की ही तरह गुंडई कर रहे है,आप का जवाब गालियों से देना उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो गया है,खाकी दागदार हो रही है,और सबसे बड़ी बात इस भ्रस्टाचार की जिसने जीना मुश्किल कर दिया है,वही महंगाई ने खाना ही कम कर दिया,खुद ही वजन घटने लगा है. बात कुछ यूँ है की.....................

आज सोचा तो आंसू भर आये
मुद्दते हो गयी मुस्कुराये .

--

Monday, January 16, 2012

विरोध का लोकतांत्रिक तरीका

लोकतंत्र में विरोध जायज है और गलत का विरोध होना भी चाहिए लेकिन सही तरीके से | जिस तरह से हम लोग वेस्ट की नक़ल हर मामलो में करते है शायद विरोध का तरीका भी हम वही से अपना रहे है | जिस तरह से बुश पर इराक में जूता फेंका गया या फिर सरकोजी  पर हाथ चलाया गया कुछ ऐसा ही अब हमारे मुल्क हिन्दुस्तान में भी हो रहा है जो की निंदनीय है | माना की राजनेताओं से यहाँ की अवाम खुश नहीं है और जनता के बीच नेताओ की छवि अच्छी नहीं है लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं की आप किसी को थप्पड़ मार दो या उसके ऊपर जूता फेंक दो या किसी और तरह से उसकी सार्वजनिक बेइजत्ती कर दो | लोकतंत्र में विरोध का तरीका भी लोकतान्त्रिक होना चाहिए | और अब समय आ गया है की इस पर ब्यापक रूप से विचार-विमर्श किया जाये | इसका एक दूसरा पहलू ये है की कही न कही लोगो को लगता है की विरोध करने से कुछ हो नहीं रहा है इसलिए लोग मजबूर होके ऐसे तरीके अपनाते है |चाहे वो चिदंबरम का मामला हो ,शरद पवार का हो ,बाबा रामदेव,प्रशांत भूषण या फिर आज सोनिया गाँधी की तस्वीर पे स्याही फेकने का मामला हो,कुल मिलकर इससे भारत की छवि भी प्रभावित हो रही है | जाहिर सी बात है की ताली दोनों हाथो से बजती है इसलिए किसी एक पक्ष को दोष देना उचित नहीं होगा ,अतः बेहतर होगा की कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए की लोकतंत्र भी बना रहे और विरोध लोकतांत्रिक तरीके से हो जिसकी प्रासंगिकता बनी रहे..............जय हो.........................

Sunday, January 15, 2012

u.p.elections...........

उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव की रणभेरी बज उठी है | सभी दल और उनके प्रत्याशी किसी भी तरह से जीत हासिल करना  चाहते है ,तरीका लोकतान्त्रिक हो या अलोकतांत्रिक कोई फर्क नहीं पड़ता है, आखिरकार जीत मायने रखती है |कोई मुस्लिमो को आरक्षण का लालच दे रहा है तो कही राज्य को पाच टुकडो में बांटा जा रहा है | अभी हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा रहा है | राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिसन से जुड़े तीन अधिकारियो की ह्त्या ने न सिर्फ रूल ऑफ ला की धज्जिया उड़ा दी बल्कि फ़ैल चुके भ्रष्टाचार की भी पोल खोल दी | इसके कारण बी एस पी के कई मंत्रियो को अपना पद भी छोड़ना पड़ा,हद तो तब हो गयी जब चाल,चरित्र और चेहरा की बात करने वाले बी जे पी ने आरोपी मंत्री कुशवाहा को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया,जाहिर सी बात है की इससे भारतीय जनता पार्टी की बहुत दुर्गति हुई और आखिरकार उसे कुशवाहा से किनारा करना ही पड़ा.पार्टियों में विचारधारा खत्म हो जाने का ये एक सशक्त उदाहरण था | खैर यही हाल सभी दलों का है,आज समाजवादी पार्टी ने कुख्यात डकैत ददुआ के लड़के को टिकट दे दिया तो कई माफिया भी इस बार माननीय बनने का प्रयास कर रहे है | अदम गोंडवी जी कुछ लाइनों का जिक्र बरबस ही आ रहा है तो सोचा की आपसे शेयर कर लिया जाये........
 पक्के समाजवादी है, तस्कर हो या डकैत
इतना असर है खादी के उजले लिबास में |







Thursday, August 13, 2009

नत कर दो मस्तक मेरा..................

नत करदो मस्तक मेरा अपनी चरण-धूल में,

अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।

करने स्वयं को गौरव-दान करता केवल निज अपमान,

बार बार चक्कर खा-खाकर मरता हूँ पल-पल में।

अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।

Wednesday, August 12, 2009

कुछ नज्में.............


नींद इस सोच से टूटी अक्सर

किस तरह कटती हैं रातें उसकी - परवीन शाकिर
ऐसे मौसम भी गुजारे हमने

सुबहें जब अपनी थीं शामें उसकी - परवीन शाकिर
आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते

अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते - अकबर इलाहाबादी
अब ये होगा शायद अपनी आग में खुद जल जायेंगे

तुम से दूर बहुत रह कर भी क्या पाया क्या पायेंगे - अहमद हमदानी


ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू सँवारे

मेरे हाथ से संवरते, तो कुछ और बात होती- आगा हश्र
कुछ तुम्हारी निगाह काफिर थी

कुछ मुझे भी खराब होना था - मजाज लखनवी
न जाने क्या है उस की बेबाक आंखों में

वो मुंह छुपा के जाये भी तो बेवफा लगे- कैसर उल जाफरी
किसी बेवफा की खातिर ये जुनूं फराज कब तलक

जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ- अहमद फ़राज


काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें

इक बेवफा को भूल न जायें तो क्या करें- अख्तर शीरानी
इस से पहले कि बेवफा हो जायें

क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जायें- अहमद फराज
इस पुरानी बेवफा दुनिया का रोना कब तलक

आइए मिलजुल के इक दुनिया नई पैदा करें- नजीर बनारसी
हम अक्सर दोस्तों की बेवफाई सह तो लेते हैं

मगर हम जानते हैं दिल हमारे टूट जाते हैं- रोशन नंदा